Iran-US-Israel tensions: ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी तनाव का असर आने वाले समय में सबसे पहले भारतीय किसानों और फिर आम लोगों पर पड़ सकता है। खरीफ सीजन की बुवाई से पहले, मानसून के दौरान धान, मक्का और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों के लिए भारत को यूरिया दोगुनी कीमत पर आयात करना पड़ सकता है। यूरिया की रिकॉर्ड खरीदारी की खबरों से वैश्विक स्तर पर कीमतों में बढ़ोतरी और आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
मध्य पूर्व में तनाव के कारण आपूर्ति बाधित होने के चलते, भारत ने इस साल की शुरुआत में चुकाई गई कीमतों के मुकाबले लगभग दोगुनी दर पर यूरिया आयात करने पर सहमति जताई है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली एक ही टेंडर में रिकॉर्ड 25 लाख मीट्रिक टन नाइट्रोजन आधारित उर्वरक आयात करने की तैयारी में है। रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन पोटाश लिमिटेड ने पश्चिमी तट पर डिलीवरी के लिए 935 डॉलर प्रति टन की दर से 15 लाख टन और पूर्वी तट पर 959 डॉलर प्रति टन की दर से 10 लाख टन यूरिया खरीदने पर सहमति जताई है।
फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर कार्रवाई से पहले, नेशनल केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स को पश्चिमी तट के लिए 508 डॉलर प्रति टन और पूर्वी तट के लिए 512 डॉलर प्रति टन की दर से बोलियां मिली थीं। रॉयटर्स के मुताबिक, यह नई खरीद 2025 के लगभग 1 करोड़ टन वार्षिक आयात का करीब एक चौथाई हिस्सा है।
संघर्ष के बाद यह भारत की पहली बड़ी खरीद है, जो मानसूनी फसलों की बुवाई से ठीक पहले की जा रही है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया आयातक है और इसका उत्पादन प्राकृतिक गैस पर निर्भर करता है, जिसका बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आता है।
तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की कमी और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कई घरेलू उर्वरक संयंत्रों को उत्पादन कम या बंद करना पड़ा है। 28 फरवरी के बाद से वैश्विक स्तर पर यूरिया की कीमतों में तेजी आई है, क्योंकि लगभग 45% सप्लाई फारस की खाड़ी के रास्ते होती है।
आयात महंगा होने से भारत का उर्वरक सब्सिडी बिल भी बढ़ सकता है, क्योंकि सरकार कंपनियों को किसानों को कम कीमत पर खाद उपलब्ध कराने के लिए सब्सिडी देती है।
जैसे ही भारत अपनी जरूरत की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा, अन्य देशों में भी उर्वरकों की मांग बढ़ने की संभावना है। इससे वैश्विक स्तर पर कीमतें और ऊपर जा सकती हैं तथा आपूर्ति पर दबाव बढ़ेगा, जिसका सीधा असर अंततः आम लोगों पर भी पड़ेगा।







