Middle East Crisis: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर संभावित हमले को 10 दिनों के लिए टाल दिया है। ट्रम्प ने गुरुवार को ट्रुथ सोशल पर बताया कि यह फैसला ईरान के अनुरोध पर लिया गया है और नई डेडलाइन अब 6 अप्रैल तय की गई है।
यह दूसरी बार है जब ट्रंप ने हमले की समयसीमा बढ़ाई है। इससे पहले भी वह पहले की डेडलाइन को आगे बढ़ा चुके थे, जो इस सप्ताह खत्म होने वाली थी। ट्रम्प ने कहा कि अब 6 अप्रैल शाम 8 बजे (अमेरिकी समयानुसार) तक ईरान के एनर्जी प्लांट्स पर कोई सैन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी।
कूटनीति को मौका
ट्रंप ने बताया कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि अमेरिका और ईरान (Iran) के बीच जारी बातचीत को आगे बढ़ने का मौका मिले। उन्होंने दावा किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत “बहुत अच्छी” चल रही है और यह कदम कूटनीतिक समाधान की दिशा में अहम कदम है। हालांकि, ईरान की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ईरान ने 10 तेल टैंकर गिफ्ट किए
ट्रंप ने कहा कि ईरान ने भरोसा दिखाने के लिए 10 तेल टैंकरों को गुजरने दिया। उन्होंने बताया कि पहले 8 टैंकरों को जाने दिया गया और बाद में 2 और भेजे गए। इन टैंकरों पर पाकिस्तान (Pakistan) का झंडा था, और ईरान ने इससे भरोसा दिखाया।
व्हाइट हाउस (White House) में कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रम्प ने कहा कि यह ईरान की ओर से बातचीत में गंभीरता दिखाने का संकेत था।
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ऑस्ट्रेलिया का रुख
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज (Anthony Albanese) ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने अमेरिका के किसी भी सहयोग अनुरोध को ठुकराया नहीं है। ऑस्ट्रेलिया ने UAE के अनुरोध पर E-7A वेजटेल निगरानी विमान भेजा था, ताकि ईरान की ओर से संभावित मिसाइल हमलों से निपटा जा सके।
हालांकि, ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) से गुजरने वाले टैंकरों की सुरक्षा के लिए सहयोग मांगा, तो ऑस्ट्रेलिया ने सीधे अनुरोध न मिलने के कारण इसमें शामिल होने से इनकार किया। बाद में ऑस्ट्रेलिया 22 देशों के समूह में शामिल हुआ, जिसने समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए संभावित मिशन पर सहमति जताई।






