Women Reservation Bill Debate: लोकसभा में गुरुवार को महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर चर्चा के दौरान माहौल उस वक्त दिलचस्प हो गया, जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) पर हल्के-फुल्के लेकिन तीखे अंदाज में तंज कसा। उनके बयान पर सदन में ठहाके गूंज उठे और खुद गृह मंत्री भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए।
क्या बोलीं प्रियंका गांधी?
बहस के दौरान प्रियंका गांधी ने कहा कि कांग्रेस महिलाओं के लिए आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन सरकार जिस तरीके से इस विधेयक को पेश कर रही है, उसमें “राजनीति की बू” साफ नजर आती है।
उन्होंने एनडीए सरकार पर आरोप लगाया कि महिला आरक्षण का मुद्दा चुनावी फायदे के लिए “पॉलिटिकल ट्रंप कार्ड” की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
इसी दौरान जब उनकी नजर अमित शाह पर पड़ी, तो वे मुस्कुराते दिखे। इस पर प्रियंका ने चुटकी लेते हुए कहा,
“हंस रहे हैं गृह मंत्री जी… आपकी चालें देख चाणक्य भी चौंकते, आपकी कुटिलता की दाद देते।”
उनके इतना कहते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से जोरदार ठहाके लगे और सदन का माहौल कुछ देर के लिए हल्का हो गया।
https://x.com/i/status/2044758423926083719
अमित शाह भी नहीं रोक पाए हंसी
प्रियंका गांधी के इस तंज पर अमित शाह भी मुस्कुराते नजर आए। उनके चेहरे के भाव से साफ था कि उन्होंने इस टिप्पणी को हल्के अंदाज में लिया। सदन में मौजूद कई सांसद भी हंसते दिखे, जिससे बहस के बीच एक अनोखा पल बन गया।
सरकार पर गंभीर आरोप भी
हंसी-ठिठोली के बीच प्रियंका गांधी ने सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं जैसे चुनाव आयोग, न्यायपालिका और मीडिया पर दबाव बना रही है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मौजूदा 543 सीटों वाली लोकसभा में सीधे 33 प्रतिशत महिला आरक्षण क्यों लागू नहीं किया जा सकता।
प्रियंका ने कहा कि अगर यह संविधान संशोधन विधेयक मौजूदा स्वरूप में पारित होता है, तो इससे लोकतंत्र पर असर पड़ सकता है।
इतिहास का हवाला देकर साधा निशाना
अपने भाषण में प्रियंका गांधी ने महिला अधिकारों के ऐतिहासिक संदर्भ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 1928 में Motilal Nehru की रिपोर्ट और 1931 के कराची अधिवेशन (अध्यक्षता: सरदार वल्लभभाई पटेल) में महिलाओं के समान अधिकारों की नींव रखी गई थी।
उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत और नगरपालिकाओं में 33% महिला आरक्षण का प्रस्ताव सबसे पहले उनके पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) की सरकार ने पेश किया था।
सियासत के बीच हल्का पल
महिला आरक्षण जैसे गंभीर मुद्दे पर हो रही बहस के बीच यह पल दिखाता है कि संसद में तीखी राजनीति के साथ-साथ हल्के-फुल्के अंदाज में संवाद भी होता है।
हालांकि, इस हंसी के पीछे छिपा सियासी संदेश साफ था विपक्ष सरकार के इरादों पर सवाल उठा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे ऐतिहासिक कदम बता रहा है।







