Nepal: नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बालेन शाह ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर नया इतिहास रच दिया। महज 36 साल की उम्र में वह देश के सबसे युवा लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री बन गए हैं। उनके साथ 15 मंत्रियों ने भी शपथ ली, जिनमें ज्यादातर युवा चेहरे शामिल हैं।
दुनिया की सबसे युवा सरकार?
नेपाल की नई सरकार को दुनिया की सबसे युवा सरकारों में गिना जा रहा है, और इसके आंकड़े इस बदलाव को साफ तौर पर दर्शाते हैं। कुल 15 मंत्रियों वाली इस कैबिनेट में 9 मंत्री 30 से 40 वर्ष के बीच हैं, जबकि सबसे युवा मंत्री की उम्र सिर्फ 29 साल है और सबसे वरिष्ठ मंत्री 51 साल के हैं। पूरी कैबिनेट की औसत उम्र महज 38 साल है, जो इस बात का संकेत देती है कि नेपाल की राजनीति में अब युवाओं का दबदबा तेजी से बढ़ रहा है।
शपथ ग्रहण और ऐतिहासिक पल
शुक्रवार दोपहर 12:34 बजे काठमांडू के शीतल निवास में आयोजित समारोह में राम चंद्र पौडेल ने संविधान के अनुच्छेद 76(1) के तहत बालेन शाह को नेपाल का 47वां प्रधानमंत्री नियुक्त किया।
बालेन शाह मधेश क्षेत्र से इस पद तक पहुंचने वाले पहले नेता भी बने हैं, जो इस नियुक्ति को और ऐतिहासिक बनाता है।

अहम मंत्रालय खुद के पास
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कई महत्वपूर्ण मंत्रालय खुद अपने पास रखे हैं:
- रक्षा मंत्रालय
- उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय
- कैबिनेट में अन्य प्रमुख नियुक्तियां:
- स्वर्णिम वागले – वित्त मंत्री
- शिशिर खनाल – विदेश मंत्री
- सूडान गुरुंग – गृह मंत्री
Gen-Z आंदोलन से बदली सत्ता
यह बदलाव अचानक नहीं आया। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार के खिलाफ युवाओं में भारी असंतोष था।
भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सोशल मीडिया प्रतिबंध जैसे मुद्दों पर ‘Gen-Z’ ने बड़े पैमाने पर आंदोलन किया। इसी दबाव के चलते सरकार गिरी और नए चुनाव का रास्ता साफ हुआ।
शपथ समारोह में संस्कृति की झलक
शपथ ग्रहण समारोह में नेपाल की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता की अनूठी झलक देखने को मिली, जहां परंपरा और आध्यात्म का अद्भुत संगम नजर आया। समारोह की शुरुआत 7 ब्राह्मणों के शंखनाद से हुई, इसके बाद 108 बटुकों ने वैदिक मंत्रोच्चार किया।
वहीं 107 बौद्ध लामाओं ने मंगल पाठ कर वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। हिंदू और बौद्ध परंपराओं के इस संगम ने समारोह को खास और ऐतिहासिक बना दिया।
क्या संकेत देता है यह बदलाव?
नेपाल में यह “युवा सत्ता” सिर्फ उम्र का बदलाव नहीं, बल्कि राजनीतिक सोच में भी बड़ा परिवर्तन है। अब देखना होगा कि यह नई पीढ़ी शासन में कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या यह बदलाव लंबे समय तक टिक पाता है।






