Pahalgam Attack Anniversary: पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले की पहली बरसी से एक दिन पहले पूरे कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सभी प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट्स पर अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
बैसरन घाटी अब भी बंद
बैसरन घाटी, जहां 22 अप्रैल 2025 को आतंकियों ने 26 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी, आज भी पूरी तरह से नहीं खोली गई है। घाटी में एक तय सीमा से आगे जाने पर सख्त पाबंदी है।

हालांकि, बेताब वैली और चंदनवाड़ी जैसे अन्य पर्यटन स्थलों पर आवाजाही जारी है।
पर्यटन पर असर, स्थानीयों में नाराजगी
हमले के बाद से पहलगाम आने वाले पर्यटकों की संख्या में 30–40% तक की गिरावट दर्ज की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बैसरन को बंद रखने से उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है। वे सवाल उठा रहे हैं कि आम नागरिकों को इसकी सजा क्यों मिल रही है।
सेना की चेतावनी– “हदें पार कीं तो जवाब मिलेगा”
भारतीय सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक सख्त संदेश जारी किया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ थीम के साथ पोस्ट में कहा गया
“कुछ हदें कभी नहीं लांघनी चाहिए। भारत कुछ नहीं भूला। जब इंसानियत की हदें पार की जाती हैं, तो मुंहतोड़ जवाब दिया जाता है। न्याय हो चुका है। भारत एकजुट है।”

ऑपरेशन सिंदूर: एयर स्ट्राइक से बदला
हमले के जवाब में भारतीय वायुसेना ने 6-7 मई 2025 की रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया। करीब 25 मिनट तक चले इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और PoK के 7 शहरों में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर ध्वस्त किया गया।
सुरक्षा के नए इंतजाम – QR कोड से निगरानी
पर्यटकों की सुरक्षा के लिए हर पोनी सर्विस प्रोवाइडर, गाइड और टैक्सी ड्राइवर को रजिस्टर कर यूनिक QR कोड दिया गया है। “स्कैन मी” सुविधा के जरिए उनकी पहचान और बैकग्राउंड चेक किया जा रहा है। अब तक करीब 7,000 लोगों को इस सिस्टम से जोड़ा जा चुका है।

इसके अलावा, बैसरन जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में 15–20 जवानों की छोटी-छोटी टीमें तैनात हैं, ताकि किसी भी घुसपैठ को रोका जा सके।
बता दें कि पहलगाम हमले की बरसी सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि सुरक्षा, जवाबदेही और न्याय का प्रतीक बन चुकी है। जहां एक ओर सेना सख्त संदेश दे रही है, वहीं स्थानीय लोग सामान्य जीवन की बहाली की उम्मीद कर रहे हैं।








