Trump on Iran Conflict: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर चल रहे तनाव और संभावित युद्ध पर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने साफ कहा है कि ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य रणनीति या युद्ध से जुड़े फैसले पूरी तरह उनके अपने हैं, और इसमें इजराइल की कोई भूमिका नहीं रही।
ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का बयान
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि इजराइल ने उन्हें ईरान के साथ युद्ध की ओर नहीं धकेला। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मीडिया संस्थान इस मुद्दे पर गलत और भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं, जिससे वास्तविक स्थिति को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।
ईरान को लेकर कड़ा रुख
ट्रंप ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है। उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 को इजराइल पर हुए हमास हमले का जिक्र करते हुए कहा कि उस घटना ने पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का रुख सुरक्षा और स्थिरता को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है।
मीडिया पर लगाए आरोप
अमेरिकी राष्ट्रपति ने मीडिया पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ रिपोर्ट्स “मनगढ़ंत कहानियां” फैला रही हैं, जिनका उद्देश्य इजराइल की भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना है। ट्रंप ने इसे गलत नैरेटिव बताया।
ईरान के भविष्य पर टिप्पणी
ट्रंप ने यह भी कहा कि यदि ईरान में “समझदार नेतृत्व” आता है तो देश आर्थिक और राजनीतिक रूप से बेहतर स्थिति में पहुंच सकता है। हालांकि उन्होंने मौजूदा नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए स्थिति को चुनौतीपूर्ण बताया।
पाकिस्तान में डील का बड़ा दावा
इससे पहले ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में दावा किया था कि ईरान के साथ एक अहम समझौता आज पाकिस्तान में साइन किया जा सकता है। हालांकि इस दावे को लेकर अभी तक आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
पाकिस्तान में कूटनीतिक हलचल
इसी बीच पाकिस्तान में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने ईरानी राजदूत रेजा अमीरी मोगद्दम से मुलाकात की।
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इस बैठक में अमेरिका के साथ संभावित वार्ता और क्षेत्रीय तनाव को कम करने के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
क्षेत्रीय तनाव और बातचीत की संभावना
होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ईरान ने अमेरिका की सैन्य गतिविधियों और बयानबाजी को सीजफायर का उल्लंघन बताया है, जबकि अमेरिका अपनी सख्त नीति पर कायम है।
शांति समझौते की कोशिशें
सूत्रों के अनुसार, यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो इसका उद्देश्य एक अस्थायी समझौता (MoU) तैयार करना हो सकता है, जिससे कुछ समय के लिए तनाव कम हो और आगे स्थायी शांति समझौते की दिशा में काम किया जा सके। हालांकि यह पूरी प्रक्रिया ईरान की भागीदारी पर निर्भर करेगी।






