West Asia Conflict: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump बार-बार दावा कर रहे हैं कि ईरान के खिलाफ 28 फरवरी से शुरू हुआ सैन्य अभियान अब अपने अंतिम चरण में है और ईरान के पास पलटवार करने की क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है। हालांकि ईरान की ओर से आए ताजा बयान इन दावों से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।
ईरान के नए सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ईरान को हुए नुकसान का मुआवजा दुश्मन देशों से लेकर रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मुआवजा नहीं दिया गया तो ईरान विरोधी देशों की संपत्तियां जब्त कर सकता है या उन्हें निशाना बनाकर तबाह कर देगा। चीनी समाचार एजेंसी Xinhua News Agency के मुताबिक खामेनेई ने यह संदेश अपने टेलीग्राम पोस्ट के जरिए दिया है।
शहीदों के खून का बदला लेने की कसम
मोजतबा खामेनेई ने अपने संदेश में युद्ध में मारे गए लोगों का बदला लेने की भी कसम खाई। उन्होंने कहा कि तेहरान अपने “शहीदों के खून” का हिसाब जरूर लेगा। ईरानी सरकारी टीवी पर एक महिला एंकर ने उनका लिखित संदेश पढ़कर सुनाया। संदेश में यह भी कहा गया कि जरूरत पड़ने पर ईरान दूसरे मोर्चे भी खोल सकता है और हमले केवल उन ठिकानों पर किए जाएंगे जहां से ईरान पर हमले किए जाते हैं।
अमेरिकी रक्षा सचिव का बड़ा दावा
दूसरी ओर अमेरिका के रक्षा सचिव Pete Hegseth ने दावा किया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई हालिया अमेरिकी हमलों में घायल हो गए हैं। उनके अनुसार लगातार चल रहे सैन्य अभियानों के कारण ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर भारी दबाव बन गया है और उन्हें छिपने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद
मौजूदा संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब Israel और United States ने ईरान की राजधानी Tehran सहित कई शहरों पर हवाई हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता Ali Khamenei, कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर और आम नागरिकों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में ईरान ने इस्राइल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे।
बातचीत से इंकार, सैन्य अभियान जारी रहेगा
ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने एक इंटरव्यू में साफ कहा कि ईरान अमेरिका के साथ युद्धविराम या बातचीत की मांग नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान ने कभी जंग रोकने की कोशिश नहीं की और देश अपनी सुरक्षा के लिए जितना जरूरी होगा उतना सैन्य अभियान जारी रखेगा।
अराघची ने यह भी कहा कि जब अमेरिका ने हमला किया तब दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही थी, इसलिए अब अमेरिका से बातचीत का कोई मतलब नहीं रह गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी बयान
विदेश मंत्री ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम Strait of Hormuz को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान ने इस रास्ते को बंद नहीं किया है, लेकिन वहां से गुजरने वाले जहाजों को लेकर फैसला सेना करती है।
साथ ही उन्होंने दोहराया कि ईरान ने कभी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं की। उनके अनुसार हमले से पहले ईरान यूरेनियम संवर्धन कम करने के लिए तैयार था, लेकिन हमलों के बाद परमाणु सामग्री मलबे में दब गई है और फिलहाल उसे निकालने की कोई योजना नहीं है।
पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात के बीच अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजारों पर बड़ा असर डाल सकता है।








