Middle East War Update: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध का आज 24वां दिन है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। रविवार रात तेल अवीव समेत कई इजराइली शहरों पर ईरान ने क्लस्टर बम से हमला किया, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।
इजराइल पर क्लस्टर बम हमला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में करीब 15 लोग घायल हुए हैं, जिनमें एक की हालत गंभीर बताई जा रही है। कई रिहायशी इमारतों और सड़कों को भी नुकसान पहुंचा है। क्लस्टर बम का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद खतरनाक माना जाता है, क्योंकि ये बड़े इलाके में भारी तबाही मचाते हैं।
तेहरान पर इजराइल का जवाबी हमला
हमले के तुरंत बाद इजराइल ने जवाबी कार्रवाई करते हुए तेहरान में मिसाइल स्ट्राइक की। इजराइली सेना ने संकेत दिए हैं कि वह इस संघर्ष को निर्णायक मोड़ तक ले जाने के लिए तैयार है। अमेरिका में इजराइल के राजदूत येचिएल लीटर ने कहा कि इजराइल तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा, जब तक ईरान को “घुटनों पर” नहीं ला दिया जाता।
ईरान की चेतावनी – होर्मुज स्ट्रेट पर खतरा
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान (Masoud Pazashkian) ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि हर हमले का जवाब मैदान में दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उसके परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया, तो होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया जा सकता है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जिसके बंद होने से वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
सीजफायर की कोशिशें, लेकिन शर्तों में अड़चन
इस बीच, डोनाल्ड ट्रम्प की टीम ईरान के साथ सीजफायर को लेकर बातचीत की कोशिश कर रही है, जिसमें जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ भी शामिल हैं। हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि पहले युद्ध रोका जाए, नुकसान का मुआवजा दिया जाए और भविष्य में हमले न होने की गारंटी मिले, तभी बातचीत आगे बढ़ेगी।
वहीं, डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने इन सभी शर्तों को मानने से फिलहाल इनकार किया है, खासकर मुआवजे की मांग को लेकर। अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत अभी नहीं हो रही है, लेकिन मिस्र, कतर और ब्रिटेन जैसे देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।
अमेरिका की मांगें क्या हैं?
अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना मिसाइल प्रोग्राम अस्थायी रूप से बंद करे, यूरेनियम एनरिचमेंट रोके और अपने परमाणु ठिकानों को निष्क्रिय करे। इसके अलावा हिजबुल्लाह और हमास को मिलने वाली फंडिंग भी बंद करने का दबाव बनाया जा रहा है।
मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। दोनों पक्ष पीछे हटने के मूड में नहीं हैं, जिससे आने वाले दिनों में संघर्ष और बढ़ने की आशंका है।






